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पाकिस्तान ने 100 साल से ज्यादा पुराने मंदिर को ढहाया, जमीन को मदरसे में शामिल करना था

 Written By: Subhash Kumar
 Published : Sep 01, 2026 08:10 am IST,  Updated : Sep 01, 2026 09:00 am IST

पाकिस्तान के पंजाब में 100 साल से ज्यादा पुराने मंदिर को गिराए जाने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, मंदिर की जमीन को मदरसे में शामिल करने के लिए कट्टरपंथियों ने इस घटना को अंजाम दिया।

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सांकेतिक फोटो। Image Source : PEXELS/AP

पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों पर जुल्म की घटनाएं लंबे समय से सामने आती रही हैं। मानवाधिकार के मामलों में पाकिस्तान का ट्रैक रिकॉर्ड लगातार खराब रहा है जिससे दुनिया वाकिफ है। ऐसे समय में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक बार फिर से हिंदू समुदाय के खिलाफ जुल्म की खबर सामने आई है। यहां कथित तौर पर एक हिंदू मंदिर को इसलिए ढ़हा दिया गया क्योंकि मंदिर की जमीन को मदरसे में शामिल किया जाना था। अधिकारियों और अल्पसंख्यक संगठनों ने सोमवार को इस घटना के बारे में जानकारी दी है।

कट्टरपंथी संगठन पर लगा आरोप

सामने आई जानकारी के अनुसार, आरोप है कि मंदिर के पास ही एक मदरसा था। ऐसे में कट्टरपंथियों ने मंदिर की जमीन को मदरसे में मिलाने के लिए मंदिर को ढहा दिया। ये मंदिर करीब 100 से 125 साल पुराना था और 1000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ था। मंदिर लाहौर से करीब 130 किलोमीटर दूर नारोवाल जिले के सिराज गांव में था। जानकारी के मुताबिक, मंदिर को ढहाने का आरोप प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) से जुड़े हुए लोगों पर लगा है।

मंदिर खुद गिरा- सरकार का दावा

दूसरी ओर पाकिस्तान की सरकार ने कहा है कि संबंधित मंदिर भारी बारिश के कारण अपने आप ढह गया है। जबकि प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मंदिर के शिखर की धातु, अन्य सामान और मलबे की ईंटों को भी बाद में वहां से हटवा दिया गया है। हिंदू समुदाय के नेताओं ने इस पुराने मंदिर को गिराए जाने की निंदा की है और सरकार से इसके मंदिर को दोबारा बनाए जाने के लिए आदेश देने की मांग की है। आपको बता दें कि इसस पहले कई बार पाकिस्तान में हिंदू महिलाओं और युवतियों के अपहरण और धर्म परिवर्तन की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।

नेताओं-अधिकारियों ने क्या दावा किया?

क्षेत्र के हिंदू समुदाय के नेता रतन लाल ने कहा- "जिला प्रशासन और विस्थापितों की संपत्ति का ट्रस्ट बोर्ड (ETPB) मंदिर स्थल की सुरक्षा करने और कथित कब्जाधारियों को हटाने के लिए जरूरी कदम उठाने में विफल रहे। इसी कारण अंतत: मंदिर को गिरा दिया गया।" वहीं, इस घटना को लेकर ETPB के अधिकारी राणा इफ्तिखार ने दावा किया है कि मंदिर भारी बारिश के कारण ढ़ह गया है। उन्होंने कहा- "हमारे रिकॉर्ड में मंदिर का कोई नाम दर्ज नहीं है। हालांकि, यह बहुत पुराना मंदिर है.यह 100 से 125 साल से अधिक पुराना था।" (इनपुट: भाषा)

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